क्या आपने कभी सोचा है कि इंटरनेट का मालिक कौन है? जिस Internet का इस्तेमाल आप हर दिन करते हैं, क्या वह किसी एक देश या कंपनी के कंट्रोल में है सच जानकर आप चौंक जाएंगे… क्योंकि इंटरनेट का कोई एक मालिक नहीं है यह किसी एक सरकार या फिर किसी एक कंपनी का नहीं है समुद्र के नीचे बिछी हजारों मील लंबी केबल्स और टियर सिस्टम के द्वारा डाटा आप तक पहुंचाया जाता है। आइए समझते हैं इसका पूरा गणित ।
Internet का आविष्कार
इंटरनेट का आविष्कार किसी एक व्यक्ति या किसी एक देश ने नहीं किया है बल्कि इसका आविष्कार कहीं वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के दशकों के संयुक्त प्रयासों से हुआ है। 1960 के दशक में ARPANET की शुरुआत हुई लेकिन आधुनिक Internet कि नींव विंट सर्फ और बॉब कान ने 1970 के दशक में TCP /IP प्रोटोकॉल विकसित करके रखी इसलिए इन्हें इंटरनेट का जनक कहा जाता है।
किस देश पर Internet का मालकिन हक
सबसे चौंकाने वाली बात यह है। कि Internet का कोई एक मालिक नहीं है। ना तो कोई देश और ना ही कोई कंपनी यह दावा कर सकती है पूरा Internet पूरी तरह से उनका है असल बात यह है कि Internet हजारों छोटे बड़े नेटवर्क का एक वैश्विक समूह है, जो अपनी मर्जी से एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं। इसके अलग-अलग हिस्सों में जैसे केबल्स सर्वस और टॉवर्स पर अलग-अलग कंपनियों का हक होता है। सरल शब्दों में कहे तो एक ऐसी कोऑपरेटिव समिति की तरह है जहां सभी कंपनियां और देश मिलकर काम करते हैं। ताकि बिना रुके डाटा एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा जा सके।
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Internet के नियम कौन बनाता है
जब डाटा इन केबल्स के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर होता है। उसे स्टोर करने और प्रोसेस करने के लिए विशाल डाटा सेंटर्स की जरूरत होती है। इन सेंटर्स में लगे सर्वर वेबसाइट और वीडियो दिखाते हैं। अब सवाल उठता है कि अगर इंटरनेट का कोई एक मालिक नहीं है। तो फिर इसके नियम कौन तय करता है। इसके लिए ICANN और IETF जैसे नॉन प्रॉफिट संगठन काम करते हैं। जो यह सुनिश्चित करते हैं की Internet दुनिया के कोने-कोने तक पहुंच सके। यह मालिक तो नहीं है बल्कि यह Internet के उसे ट्रैफिक पुलिस की तरह है जो व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए काम करते हैं।
ऑप्टिकल केबल्स के बिना मुमकिन नहीं है यह काम
लगभग सभी लोगों को ऐसा लगता है की Internet सेटेलाइट के द्वारा चलता है लेकिन सच यह है कि दुनिया का 99% समुद्र के नीचे बिछी पतली फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए सफर करता है। यह केबल्स अलग-अलग देशों के तटों पर बने लैंडिंग स्टेशनों पर खत्म होती है अगर हम भारत की बात करें तो यह स्टेशन मुंबई चेन्नई कोच्चि यह कुछ ऐसी जगह है। जहां से पूरी दुनिया का Internet हमारे देश में प्रवेश करता है। आपको यह बात जानकर हैरानी होगी अगर समुद्र के अंदर कोई एक केबल कट जाता है तो कई देशों के इंटरनेट संपर्क पूरी तरह से बंद हो जाता है
निष्कर्ष
आज के समय में Internet हमारी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा नेटवर्क किसी एक व्यक्ति, कंपनी या देश के कंट्रोल में नहीं है। यह हजारों नेटवर्क, सर्वर, फाइबर ऑप्टिक केबल्स और टेक्नोलॉजी का एक साझा सिस्टम है, जो आपसी सहयोग से काम करता है।
ICANN और IETF जैसे संगठन इसके नियम और संरचना को व्यवस्थित रखते हैं, ताकि Internet सुरक्षित, तेज और सभी के लिए उपलब्ध बना रहे।सबसे दिलचस्प बात यह है कि Internet की ताकत इसी में है कि यह विकेन्द्रीकृत (Decentralized) है। यानी अगर इसका कोई एक हिस्सा बंद भी हो जाए, तो बाकी नेटवर्क काम करता रहता है। यही कारण है कि आज दुनिया के करोड़ों लोग बिना रुकावट के एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
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