गरीब घर का लड़का बना IAS, 3 बार फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार

गरीब मजदूर का बेटा IAS बनने की प्रेरणादायक कहानी हिंदी मेंai image

गरीब मजदूर का बेटा बना IAS यह कहानी है अर्जुन की, जिसने गरीबी और संघर्ष के बावजूद अपने सपने को सच कर दिखाया। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर उसने UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास की और लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया।

गरीबी में जन्म, लेकिन सपने बड़े थे

उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव में रहने वाला Arjun एक साधारण परिवार से था। उसके पिता खेतों में मजदूरी करते थे। और मां घर-घर काम करके खर्चे चलाते थी। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी। कई बार दो वक्त का खाना मुश्किल से मिल पाता था। लेकिन इन सब हालातो के बीच अर्जुन का सपना बहुत बड़ा था। अर्जुन ने IAS बनने का सपना देखा।

IAS बनने का सपना कैसे शुरू हुआ

Arjun बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा था। वह सरकारी स्कूल में पढ़ता था। हमेशा अव्वल आता था। एक दिन स्कूल में शिक्षक ने बच्चों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं। जब अर्जुन की बारी आई उसने पूरे आत्मविश्वास से कहा मैं IAS बनना चाहता हूं। उसी दिन से उसने इस सपने को अपना लक्ष्य बना लिया।

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पैसों की कमी और संघर्ष भरी जिंदगी

12वीं पास करने के बाद Arjun के सामने सबसे बड़ी चुनौती आई — पैसे की कमी। परिवार की हालत ऐसी नहीं थी कि वह शहर जाकर पढ़ाई कर सके। ऐसे में उसने फैसला किया कि वह खुद कमाएगा और अपनी पढ़ाई भी जारी रखेगा। वह शहर गया और एक छोटे से होटल में काम करने लगा। दिन में काम और रात में पढ़ाई, यही उसकी दिनचर्या बन गई।

कठिन मेहनत और लगन

अर्जुन ने अपने हालातो को कभी भी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह पुरानी किताबों से पढ़ाई करता लाइब्रेरी में घंटों बिताता और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता। कई बार थकान के कारण किताब खोलते ही सो जाता। लेकिन उसके अंदर का जुनून उसे हर सुबह फिर से खड़ा कर देता।

UPSC की तैयारी आसान नहीं होती। Arjun ने भी कई बार असफलता का सामना किया। पहले प्रयास में ही असफल हो गया। दूसरे प्रयास में वह मेन्स तक पहुँचा लेकिन चयन नहीं हो पाया। तीसरे प्रयास में इंटरव्यू तक पहुँचकर भी वह अंतिम सूची में जगह नहीं बना सका।हर असफलता समाज और रिश्तेदारों के ताने बढ़ाते कोई नौकरी कर ले। यह तेरे बस की बात नहीं ‌है।उसने अपनी गलतियों को समझा अपनी रणनीति बदली पहले से भी ज्यादा मेहनत करना शुरू कर दिया।

चौथे प्रयास में मिली सफलता

चौथे प्रयास में Arjun ने अपनी पूरी मेहनत लगा दी। उसने अपने कमजोर विषयो पर विशेष ध्यान दिया 10 से 12 घंटे पढ़ाई की और खुद पर विश्वास बनाए रखा। आखिरकार फिर वह दिन आया जब यूपीएससी का रिजल्ट घोषित हुआ।जब अर्जुन ने अपना नाम सूची में देखा तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। यह सिर्फ उसकी जीत नहीं थी। बल्कि उसके परिवार का संघर्ष त्याग और विश्वास की भी जीत थी। मजदूर का बेटा IAS अधिकारी बन चुका था।जब अर्जुन अपने गाँव लौटा, तो पूरा गाँव उसके स्वागत के लिए खड़ा था। वही लोग जो कभी उस पर शक करते थे, आज उसकी तारीफ कर रहे थे। उसके माता-पिता के चेहरे पर गर्व साफ दिखाई दे रहा था।

आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा

आज Arjun न सिर्फ IAS अधिकारी है। बल्कि उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। जो यूपीएससी की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी है। कहानी हमें सिखाती है। की सफलता उन्हीं को मिलती है। कभी हार नहीं मानते सपने देखना बहुत आसान है। लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। आप भी अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। परिस्थितियों को दोष देना बंद करें। और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह से जुट जाएं। क्योंकि जीत उन्हीं की होती है। जो अंत तक डटे रहते हैं।

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