भारत में एलपीजी गैस लगभग अब हर घर की जरूरत बन चुकी है। गांव से लेकर शहरों तक करोड़ परिवार खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते है। लेकिन मार्च 2026 में देश के कई राज्यों से यह खबर सामने आ रही है। की कई जगहों पर लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा, जबकि कुछ राज्यों में गैस एजेंसी पर बुकिंग का दबाव बढ़ गया है।
ईरान युद्ध के कारण भारत में एलपीजी गैस और तेल को लेकर एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। युद्ध के 13 वे दिन कई शहरों में गैस के लिए लंबी लाइन लग रही है। सड़क से लेकर सांसद तक राजनीति गरम है। सरकार ने कहा है ।कि क्रूड तेल की सप्लाई सुरक्षित है। और देश में पेट्रोल डीजल की कमी नहीं है। लेकिन विपक्ष इस संकट को लेकर सरकार पर दबाव डाल रहा है। विपक्ष मानता है। देश आंतरिक और विदेश नीति में असफल हो गया है।
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भारत में एलपीजी गैस की असली स्थिति।
सबसे पहले यह समझना बहुत जरूरी है। कि भारत दुनिया में सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ताओं में से एक है। देश में हर महीने करोड़ सिलेंडर की खपत होती है। भारत 55 से 60% एलपीजी गैस विदेशों से आयात करता है। इसका मतलब यह है। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की सप्लाई या ट्रांसपोर्ट में थोड़ी भी समस्या आती है। तो उसका सीधा असर भारत के बाजारों में भी दिखाई देता है।

अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई में बाधा
मार्च 2026 में एलपीजी की कमी की चर्चा का सबसे बड़ा करण वैश्विक सप्लाई चैन में आई रुकावट है। भारत में ज्यादातर एलपीजी खाड़ी देशों से समुद्र के रास्ते आता है। अगर इन समुद्री रास्तों में जहाज आवाजाही कम हो जाती है। या फिर किसी कारण से जहाजों की संख्या मैं कम हो जाती है। तो गैस की सप्लाई में देरी होने लगती है। जब बंदरगाह पर गैस सिलेंडर से भरे जहाज समय पर नहीं पहुंच पाते तो रिफायनरी और गोदामों में गैस का स्टॉक कम हो जाता है। इसके कारण गैस एजेंटीयों तक सिलेंडर पहुंचाने में देरी होती है।
एलपीजी की मांग में तेजी
पिछले कुछ वर्षों से भारत में एलपीजी गैस की मांग तेजी से बड़ी है। इसका एक सबसे बड़ा कारण है सरकार की योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना है। इस योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त में गैस सिलेंडर दिए गए हैं। जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी गैस का इस्तेमाल अधिक होने लगा है। अब स्थिति है कि पहले की तुलना में हर महीने ज्यादा सिलेंडर की जरूरत पड़ने लगी है। ऐसे में अगर सप्लाई थोड़ी सी भी कम हो जाती है। तो तुरंत कमी जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
गैस एजेंसियों पर दबाव
जब लोगों को गैस की कमी की खबर सुनाई देती है। तो कई लोग समय से पहले ही सिलेंडर बुक कर लेते हैं। भले ही उनके घर में गैस बची हो। इसे Panic Booking कहा जाता है। ऐसी स्थिति में गैस एजेंसी के पास बहुत ज्यादा बुकिंग आ जाती है। जिससे डिलीवरी सिस्टम पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है। और लोगों को गैस मिलने में देरी होने लगती है। और कई बार यही देरी लोगों को गैस की कमी जैसी लगने लगती है।
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लॉजिस्टिक और परिवहन समस्या
एलपीजी गैस की सप्लाई एक लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरती है। रिफाइनरी में गैस तैयार होने के बाद उसे टैकरो में भरा जाता हैं। और फिर गोदाम तक पहुंचाया जाता है। और फिर वहां से गैस एजेंसी को सिलेंडर दिए जाते हैं। उसके बाद एजेंसी के कर्मचारी सिलेंडर घर-घर पहुंचते हैं। अगर इस पूरी प्रक्रिया में कहीं पर भी देरी होती है। तो सिलेंडर समय पर एजेंसियों तक नहीं पहुंच पाते हैं। इससे कुछ समय के लिए स्थानीय स्तर पर एलपीजी की कमी दिखाई देने लगती है।
कमर्शियल सिलेंडर की ज्यादा खपत
आजकल होटल, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड सेंटर और छोटे ढाबों में LPG का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।कमर्शियल सिलेंडर की मांग बढ़ने से सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई बार जब कमर्शियल सेक्टर ज्यादा गैस इस्तेमाल करता है, तो गैस एजेंसियों को घरेलू और कमर्शियल सप्लाई के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है।
कालाबाजारी
कुछ क्षेत्रों में गैस की कमी की खबरों का फायदा उठाकर कुछ लोग ज्यादा सिलेंडर जमा कर लेते हैं।इसके अलावा कई जगहों पर घरेलू सिलेंडर को होटल या दुकानों में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध गैस कम हो जाती है।हालांकि सरकार और तेल कंपनियां समय-समय पर ऐसे मामलों पर कार्रवाई करती हैं, लेकिन फिर भी कुछ जगहों पर यह समस्या देखने को मिल जाती है।
भारत सरकार की तैयारी
सरकार और तेल कंपनियां इस स्थिति को सामान्य रखने के लिए कई कदम उठा रही हैं।गैस का आयात बढ़ाने की कोशिश की जा रही हैरिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाया जा रहा हैगैस एजेंसियों की सप्लाई पर नजर रखी जा रही हैजमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई गई हैइन उपायों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई में कोई बड़ी परेशानी न हो।
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