बिहार सरकार स्क्रीन टाइम कानून 2026 बच्चों को डिजिटल लत और ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते खतरे से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कानून का उद्देश्य बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना और उनकी ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना है।जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए नई योजनाएं चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग और स्क्रीन टाइम की लत चिंता का विषय बन चुकी है। इसी समस्या को देखते हुए बिहार सरकार बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है।
बिहार सरकार स्क्रीन टाइम कानून क्या है,डिजिटल लत: एक अदृश्य खतरा
आज के दौर में स्मार्टफोन बच्चों के लिए खिलौना कम लत ज्यादा बन गई है । विधानसभा में चर्चा के बाद ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में एकाग्रता की कमी और उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन देखने को मिल रहा है। सरकार का यह नया कानून इसी मानसिक आश्रम को रोकने के लिए एक नई पहल है।

NIMHANS से मांगी गई वैज्ञानिक रिपोर्ट
विशेषज्ञों के अनुसार बिहार सरकार स्क्रीन टाइम कानून डिजिटल संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।NlMHANS की वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार। बिहार सरकार इस नीति को बिना किसी वैज्ञानिक आधार के लागू नहीं करना चाहती है।NlMHANS बेंगलुरु से एक विस्तृत रिसर्च रिपोर्ट मांगी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही तय किया जाएगा की किस आयु के बच्चों के लिए कितना स्क्रीन टाइम सुरक्षित होगा।और किन गेम्स को हानिकारक या सट्टेबाजी की श्रेणी में रखा जाएगा और प्रतिबंधित किया जाएगा।
बिहार सरकार स्क्रीन टाइम कानून क्या है, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार स्क्रीन के सामने समय बिताने से बच्चों के मस्तिष्क के विकास पर असर पड़ सकता है। कम उम्र में अत्यधिक मोबाइल उपयोग से नींद की कमी, आँखों की समस्या और व्यवहार में बदलाव देखने को मिलता है।National Institute of Mental Health and Neurosciences की विभिन्न रिपोर्टों में यह बताया गया है कि डिजिटल लत धीरे-धीरे मानसिक अवसाद और सामाजिक अलगाव का कारण बन सकती है।बच्चे जब वास्तविक खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों से दूर हो जाते हैं, तो उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है।
स्कूलों में डिजिटल हाइजीन पढ़ाई जाएगी
सरकार का मानना है कि केवल पाबंदी ही समाधान नहीं है। बल्कि शिक्षा ही असली बचाओ है। इसलिए अब बिहार के स्कूलों में डिजिटल हाइजीन को एक विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। जीविका दीदीयो और शिक्षकों के माध्यम से ग्रामीणों के घर-घर जाकर बच्चों के माता-पिता को जागरूक किया जाएगा वह बच्चों के डिजिटल व्यवहार को किस तरह मैनेज कर सकते हैं।
बिहार सरकार स्क्रीन टाइम कानून क्या है,तकनीकी और कानूनी नियंत्रण
प्रस्तावित नियम के अनुसार मोबाइल कंपनियां और गेमिंग ऐप्स पर भी कड़े नियम लागू हो सकते हैं। आटो लॉक फीचर बच्चों के लिए एक ऐसे विशेष ऐप मोड हो जो कुछ समय के बाद खुद ही बंद हो जाए। बच्चों को टारगेट करने वाले गेमिंग और बैटिंग सट्टेबाजी के विज्ञापनो पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए। बिहार सरकार हर जिले में डिजिटल नशा मुक्ति केंद्र खोलेंगे जहां मनोवैज्ञानिक बच्चों की मदद करेंगे।
सामाजिक और सामुदायिक भागीदारी।
यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है। बल्कि सामाजिक आंदोलन है। सरकार चाहती है की माता-पिता अपने बच्चों को मोबाइल देने की बजाय उन्हें बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें। स्क्रीन फ्री घंटे को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
माता-पिता की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
सरकार कानून बना सकती है, लेकिन बच्चों की डिजिटल आदतों को नियंत्रित करने में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम है।
- बच्चों के साथ प्रतिदिन बातचीत करें
- स्क्रीन टाइम के लिए निश्चित समय तय करें
- मोबाइल को पढ़ाई और सीखने के उद्देश्य से उपयोग करने की आदत डालें
- रात में सोने से पहले मोबाइल उपयोग बंद करवाएं
यदि घर में अनुशासन होगा तो कानून का प्रभाव और मजबूत होगा।
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अन्य राज्यों की पहल
भारत के कई राज्य डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा पर भी काम कर रहे हैं।उत्तर प्रदेश में युवाओं को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने की पहल चल रही है, वहीं बिहार अब डिजिटल नियंत्रण और संतुलन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।यह संतुलन ही भविष्य की असली आवश्यकता है — जहां तकनीक भी हो और नियंत्रण भी।
बिहार सरकार स्क्रीन टाइम कानून क्या है,साइबर बुलिग और ऑनलाइन सुरक्षा
यह कानून केवल स्क्रीन टाइम तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी ध्यान देगा। सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चों के साथ होने वाली बदसलू की साइबर ठगी के खिलाफ एक शिकायत नियंत्रण तंत्र बनाया जाएगा।
बच्चों के डेटा के व्यवसायिक पर कड़ा नियंत्रण लगाया जाएगा ताकि उनकी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखा जा सके।
यह कानून बच्चों के भविष्य के लिए एक डिजिटल सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य है बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग की लत से और स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों बचाकर उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करना है। इससे बच्चों की एकाग्रता बढ़ेगी चिड़चिड़ापन काम होगा। और उनके साथ होने वाले ऑनलाइन बदसलूकी का साइबर ठगी से सुरक्षा मिलेगी। साथ ही है साथ ही यह कानून उन्हें डिजिटल दुनिया के जाल से बाहर निकाल कर मैदानी खेलो और वास्तविक सामाजिक मेलजोल के लिए प्रेरित करेगा। जिससे उनका शारीरिक विकास भी बेहतर होगा।
बिहार सरकार का यह कानून किसी तकनीकी का विरोध करना नहीं है। बल्कि बच्चों को स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग से बचाने की एक नई पहल है। बढ़ता भारत यह लक्ष्य तभी संभव है। जब हमारे आने वाली पीढ़ी तकनीकी का प्रयोग सीखने और इसकी लत का शिकार ना हो यह कदम बढ़ते भारत की जड़ों को मजबूत करने की दिशा में क्रांतिकारी फैसला साबित होगा
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