गर्मी में बढ़ता हार्ट अटैक का रिस्क , अगर हार्ट कंडीशन में हो या उम्र 60 से अधिक है। तो क्या सावधानियां बरतें।

गर्मी में बढ़ता हार्ट अटैक का रिस्क , अगर हार्ट कंडीशन में हो या उम्र 60 से अधिक है। तो क्या सावधानियां बरतें।गर्मियों का मौसम यू तो हमारे शरीर को थकाने और परेशान करने का काम करता है। लेकिन गर्मी के कारण हमारी कार्डियोवस्कुलर पड़ने वाला बोझ काफी भारी होता है। यूएस एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी के मुताबिक अमेरिका में हर साल हार्ट अटैक से होने वाली मौत 1300 से भी ज्यादा इसकी जिम्मेदार हीट वेव है। अमेरिका के हॉट संगठन के जनरल वर्ष 2023 के एक स्टडी के दौरान तेज गर्मियों और हीट वेव के दौरान हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है।

गर्मियों का मौसम यू तो हमारे शरीर को थकाने और परेशान करने का काम करता है। लेकिन गर्मी के कारण हमारी कार्डियोवस्कुलर पड़ने वाला बोझ काफी भारी होता है।

यूएस एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी के मुताबिक अमेरिका में हर साल हार्ट अटैक से होने वाली मौत 1300 से भी ज्यादा इसकी जिम्मेदार हीट वेव है। अमेरिका के हॉट संगठन के जनरल वर्ष 2023 के एक स्टडी के दौरान तेज गर्मियों और हीट वेव के दौरान हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है।

और यह स्टडी चीन में हुई। इस स्टडी में वर्ष 2015 से लेकर 2020 के बीच हार्ट अटैक से हुई तो 2 लाख मौत से ज्यादा डिटेल कैस स्टडी की गई। रिसर्च के दौरान पाया गया की हार्ट अटैक और डेथ के केसेस अचानक इन स्थितियों में काफी बढ़ जाते हैं।

अगर तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है यानी एक्सट्रीम गर्मी।

तापमान बहुत ज्यादा काम होने पर यानी एक्सट्रीम ठंड।

अगर गर्मी और प्रदूषण दोनों साथ साथ बढ़ जाते हैं।

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को ज्यादा हुए हार्ट अटैक।

गर्मियों में हार्ट अटैक की संभावना क्यों ज्यादा बढ़ जाती है। जानिए

हमारी बॉडी दो तरह से गर्मी को शरीर से बाहर निकलती है। और शरीर को ठंडा करने की कोशिश करती है। यही दोनों प्रक्रियाओं पर दिल पर जोर पड़ता है।

रेडिएशन, जब आसपास की हवा शरीर के तापमान से ठंडी होती है। उसे समय हमारा शरीर हिट को हवा में उत्तेजित करता है। और इस प्रक्रिया में बल्ड सरकुलेशन सिस्टम एक्स्ट्रा काम करने लगता है। ताकि बार‌ की हवाएं ठंडक से शरीर की सीमाओं को प्रभावित न कर सके। शरीर के त्वचा और बाहर की लेयर में गर्मी बनी रहे।

वाष्पीकरण, हमारी बॉडी अपना नार्मल टेंम्प्रेचर बनाए रखने के लिए जी दूसरी प्रक्रिया को अपनाता है। वाष्पीकरण यानी की पसीने के माध्यम से शरीर की अतिरिक्त गर्मि को बाहर निकलना हमारी बॉडी को ठंडा रखने की कोशिश करना। गर्मी में ज्यादा कर ज्यादा पसीना इसलिए आता है क्योंकि शरीर लगातार खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता रहता है।

और इन दोनों प्रक्रिया में हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं में दौड़ रहे रक्त की सबसे बड़ी भूमिका है। और यही कारण है कि जब हवा का तापमान शरीर के तापमान के करीब या उससे ज्यादा हो जाता है। तो शरीर को गर्मी से बचने के लिए दिल की धड़कन बढ़ जाती है। और अधिक बल्ड पप करना पड़ता है।

किन लोगों को हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा है।

हीट वेव में इन लोगों को ज्यादा रिस्क है।

जिन्हें एक बार हार्ट अटैक हो चुका हो।

जो अभी हार्ट कंडीशन से जूझ रहे हैं।

जो हाइली डायबिटिक है।

जिन लोगों को लवर से संबंधित समस्या है।

जो ज्यादा ड्रिंक और स्मोकिंग करते हैं।

और सबसे ज्यादा 60 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाएं जो डायबिटीज या स्मोक करती है।

हार्ट अटैक से बचने के लिए गर्मी के मौसम में क्या-क्या सावधानियां करनी चाहिए।

जिन लोगों को पहले से ही हार्ट कंडीशन नहीं है। लेकिन उनकी उम्र बहुत ज्यादा है या लाइफस्टाइल डिजीज है। इन सब लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

मौसम के अनुसार मेडिकेशन के हर संभव उपाय करें या फिर किसी डॉक्टर से मिलकर परामर्श जरूर करें।

ज्यादा तापमान बढ़ने पर घर को ठंडा करने के लिए हर संभव कोशिश करें।

तेज धूप और लोग में घर से बाहर न निकले। अगर निकालना जरूरी है तो बचाव के साथ बाहर निकले।

हल्के और नरम सूती कपड़े पहने।

गर्मी में खाने को लेकर विशेष सावधानी बरते ज्यादा मसाले वाला तालि भुना भोजन न करें। यह सब चीज शरीर के तापमान को बढ़ाती है।।

अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो गर्मियों के मौसम में स्मोकिंग और ड्रिंक से परेहज रखें।।

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