आपके अंदर की काबिलियत आपके काम से झलकती है-इम्तियाज अली।
हाल ही में इम्तियाज अली अपनी फिल्म चमकीला को लेकर चर्चा में है। कहीं दशकों के लंबे करियर के बाद कहीं हिट फिल्मों ने उन्हें जो सिखाया आज उनकी जुबानी सुनिए।
इम्तिहान अली बताते हैं। मेरे परिवार में फिल्म देखना बहुत ही ज्यादा बुरी बात समझी जाती थी। और खासकर बच्चों का तो फिल्म देखना संभव ही था। और आज तक मेरे घर पर फिल्म मैगज़ीन नहीं आई। और हम बच्चे अपनी बुआ के घर जाते थे। और वही सिनेमा घर में फिल्म देख पाते थे। यह बात जमशेदपुर की है। उसे टाइम वह दो सिनेमाघर होते थे। और उन दोनों सीने में घरों के प्रोजैक्सन रूम को दो भाई संभालते थे। और इम्तिहान अली ने उनसे दोस्ती की और उनके काम में मदद भी करते थे। और बदले में उनको उस सुरक में थोड़ी हिस्सेदारी मिल जाती थी। जो प्रोजेक्शन रूम में होता था। यही बचपन का वह दौर था जब मुझे लगता था कि मैं लूजर हूं और मैं किसी काम का नहीं हूं। लेकिन मैसेज स्वीकारना नहीं चाहता था तो अपने बाद बारे में बातें गढ़ लेता था। और घर पर बताता था कि मैं स्कूल टीम का कैप्टन हूं और स्कूल में बताता था कि मोहल्ले की टीम का कैप्टन हूं। मुझे पता था कि यार आज कोई नहीं जान पाएगा क्योंकि उसे समय स्कूल और घर वाले दोस्त आपस में नहीं मिलते थे मैं स्कूल में ड्रामा करने शुरू किया। और कई साल तक स्कूल स्टेज ड्रामा किया लेकिन खुद को दिखाने से ज्यादा में ज्यादा आकर्षण महसूस करता था। कि मैं चीजों को कैसे देख सकता हूं। और इसलिए शायद मैं निर्देशक हूं मुंबई में एक कोर्स के बाद में किसी और एजेंसी में कॉपीराइटर की नौकरी चाहता था। और नौकरी के बाद मुझे कहा जाता था कि कमाल का लिखा है तुमने। और डेढ़ साल तक मुझे कोई नौकरी नहीं मिली। पर मुझे लगता था कि कोई मुझे यह करने से रोक रहा है। ज़ी टीवी में जैसे तैसे काम मिला। इस दौरान मैंने सूचना लिखी। और इसे मैं अभय देओल को लेकर बनाना चाहता था मुझे सनी देओल से मुलाकात करनी थी। यह कहानी बहुत ही ज्यादा इमोशनल और सॉफ्ट किस्म की थी। लेकिन सनी देओल की इमेज एंग्री यंग मैन वाली। लोगों ने मुझसे कहा कि बात नहीं बनने वाली। और मैं सनी से मुलाकात करने एक हिल स्टेशन पर पहुंचा। और उन्होंने कहा की शूटिंग दिन में रहती है। तो किसी भी दिन या रात सुबह-सुबह बैठ कर बात करते हैं या फिर तब जब बारिश हो जाए उनका यह कहना ही था की बारिश होने लगी मैंने कहानी सुनना शुरू की 2 घंटे तक वह मुझे सुनते रहे। और बेहद ही ज्यादा शर्मीले अंदाज में रिएक्शन देते थे आखिर में बोले मैं या फिल्म ना रहा हूं सभी नौजवानों के लिए बात ध्यान देने वाली है कि सनी ने पूरी मुलाकात में मुझे एक बार भी नहीं पूछा कि मैं कहां से आया हूं मैं क्या किया है और क्या लिखा है थिएटर क्या है या टीवी उन्होंने मुझे मुझ में इन चीजों को देखा मैंने कोई रिज्यूम नहीं थमाया उन्होंने केवल महसूस किया कि यह लड़का बना लेगा फिल्म आप जो रिज्यूम लिखते हैं वह आप में झलकना भी चाहिए।
सफलता से कुछ बदलता है।
मैं आज और पुराने इम्तियाज में कोई भी फर्क महसूस नहीं करता हूं। सफलता कोई नया घर और कोई नई कर नहीं है कि वह आएगी और सब कुछ बदल जाएगा। और ऐसा भी नहीं है कि सफल होने से आपके पास किसी तरह की पात्रता या ऐसा कुछ आ जाता है। सफलता से असलियत में कुछ भी नहीं बदलता है।
इंटरव्यू के दौरान फिल्म कलाकार इम्तियाज अली

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