प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0: 27.8 लाख प्रशिक्षण का दावा, लेकिन 178 केंद्र ब्लैकलिस्ट क्यों ?

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के तहत 178 ट्रेनिंग सेंटर ब्लैकलिस्ट, 41 एफआईआर दर्ज और खाली पड़े प्रशिक्षण केंद्रों की तस्वीरGoogle image
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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के तहत सरकार का दावा है कि 38 से अधिक सेक्टरों में लगभग 27.8 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है। वेलनेस, फूड प्रोसेसिंग, ब्यूटी, हस्तशिल्प से लेकर एयरोस्पेस और एविएशन तक इस योजना का विस्तार किया गया है।

लेकिन जमीनी हकीकत एक अलग कहानी बयां करती है।प्रधानमंत्री कौशल विकस योजना 4.0 38 से ज्यादा अलग-अलग सेक्टर में वेलनेस, फूड प्रेसिंग ब्यूटी और हस्तशिल्प से लेकर एयरोस्पेस और एविएशन इस योजना के तहत करीब 27.8 लाख युवाओं को स्किल ट्रेनिंग दी गई। लेकिन हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखाती है। कहीं ऐसे ट्रेनिंग सेटर है जहां कभी 30 30 अभ्यर्थी एक साथ प्रशिक्षण लेते थे।आज वही ‌ ट्रेनिंग सेटर सुनसान पड़े हैं। कक्षाओं में सन्नाट है प्रयोगशाला में धूल जम चुकी है। और अब वहां किसी गतिविधि का नामोनिशान तक नहीं है।यह वे केंद्र है। जो सरकार ने अक्टूबर 2025 प्रधानमंत्री कौशल योजना और उद्यमिता मंत्रालय के द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिये गई। 178 प्रशिक्षण केंद्रों और परीक्षण भागीदारों की सूची में शमिल है।

30 अक्टूबर को प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को सूचित किया कि 178 ट्रेनिंग सेंटर पीएमकेवीवाई के नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इसी के चलते इन सभी ट्रेनिंग सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की गई और जुर्माने की वसूली प्रक्रिया को प्रारंभ कर दिया गया।1 दिसंबर 2025 को कौशल मंत्री जयंत चौधरी लोकसभा में यह जानकारी दी। ब्लैकलिस्ट करने के अलावा 41 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।

पीएमकेवीवाई के अंतर्गत चलने वाले पाठ्यक्रम 300 से 600 घंटे की अवधि के होते हैं।

इस घटना का असर न केवल ब्लैकलिस्ट किए गए ट्रेनिंग सेंटर पर पड़ा है, बल्कि राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के द्वारा स्थापित किए गए श्वेत उद्योग नेतृत्व वाली कई कौशल क्षेत्र पर भी पड़ है। जो पीएमकेवीवाई को लागू करती है। इन 178 संस्थाओं मे से 19 का संचालन एसएससी द्वारा किया जाता है। जैसे की मीडिया वस्त्र पर्यटन और दूरसंचार जैसे क्षेत्र शामिल है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0:

NSDC टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया अधिकारियों का कहना है। ब्लैकलिस्टग कहीं चरणों वाली है। जैसे की मौके निरीक्षण समीक्षा और करण बताओ नोटिस शामिल है। इस योजना के तहत 2022 में चौथे संस्करण के शुभ आरंभम जारी किए गए 26 पेजों की निगरानी दिशा निर्देशोंमे कहा गया है। ब्लैकलिसग या निलंबन के ममलों पर अंतिम निर्णय एनएसडीसी के द्वारा किया जाएगा।

ब्लैकलिस्टिंग किए गए ट्रेनिंग सेंटर की सख्या पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत 12840 केंद्रो का एक छोटा सा हिस्सा है।

जमीनी हकीकत: खाली पड़े प्रशिक्षण केंद्र

हापुर उत्तरप्रदेश फूड फटोग्राफी

हापुड़ जिले के भैना सदरपुर गांव में स्थित सरदार सिंह मेमोरियल कॉलेज में बनाई गई फूड फोटोग्राफी लैब इन दिनों सुनसान नजर आती है। इस लैब की स्थापना कॉलेज के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह तोमर ने की थी, ताकि युवाओं को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण दिया जा सके।

तोमर ने 20 मई 2025 की एक ‘कारण बताओ’ नोटिस की प्रति दिखाई, जिसमें बताया गया था कि केंद्र को कार्य दिवस के दौरान बंद पाए जाने के आरोप में छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है।

हालांकि, तोमर का कहना है कि यह कार्रवाई गलतफहमी के आधार पर की गई। उनके अनुसार, निरीक्षण के दौरान अधिकारी ने गलती से उसी गांव में उनके परिवार द्वारा संचालित किसी दूसरे स्कूल की तस्वीरें अपलोड कर दीं, जबकि कौशल प्रशिक्षण केंद्र कॉलेज परिसर में संचालित हो रहा था।

उन्होंने अपने बचाव में मंत्रालय को भेजे गए जवाब और संबंधित तस्वीरें भी साझा कीं, जिनके जरिए वे यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि निरीक्षण रिपोर्ट में त्रुटि हुई थी।

मुरादाबाद उत्तरप्रदेश बुनियादी चिकित्सा सहायता केंद्र।

ठाकुरद्वारा में कृष्णा महविद्यालय के अंदर एक अन्य केंद्र है जिसके चारों तरफ खेत है। को बंद कर दिया गया है बुनियादी चिकित्सा कौशल परीक्षण के लिए स्थापित किए गए केंद्र में नकली अस्पताल बिस्तरों पर भी अभी तक पुतले पड़े हुए हैं।प्रधानाचार्य डॉक्टर राधेश्याम सिंह ने बताया है, कि यहां सिर्फ 6 बैचों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। जिनमें लगभग 80% की उपस्थित हुए है। परियोजना प्रभारी राजेश कुमार ने 30 अप्रैल 2025 की सूचना देते हुए बताया कि जब वह दौरे पर गए तो कोई भी उम्मीदवार उपस्थित नहीं था लेकिन उसे दिन 50 छात्रों उपस्थिति दर्ज की गई थी।

दिल्ली स्थित Edujoin Training Foundation का उदाहरण भी इसी विवाद को उजागर करता है। इसका मध्य प्रदेश के झाबुआ में संचालित केंद्र ब्लैकलिस्ट की सूची में शामिल है।संस्थान के निदेशक सुधांशु परिदा ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की प्रति साझा की है। इसमें “दुर्व्यवहार, आपराधिक गलतबयानी और धमकी” जैसे आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर में दावा किया गया है कि जिस दिन निरीक्षण हुआ, उस दिन केंद्र बंद पाया गया, लेकिन आधार-आधारित बायोमेट्रिक सिस्टम में 26 प्रशिक्षुओं की उपस्थिति दर्ज थी, जिसे फर्जी बताया गया है।

एफआईआर में “आपराधिक विश्वासघात” का भी आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि यह देखकर हैरानी हुई कि 26 उम्मीदवारों की उपस्थिति आधार बायोमेट्रिक सिस्टम में दर्ज थी, जबकि उस दिन प्रशिक्षण केंद्र बंद था।

कि यह कार्रवाई परिस्थितियों को नजरअंदाज करके की गई। उनके अनुसार, दिवाली से ठीक पहले का दिन होने के कारण केंद्र दोपहर करीब 12 बजे ही बंद कर दिया गया था, जबकि निरीक्षण टीम दोपहर 3:30 बजे पहुंची। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर उस दिन छात्र मौजूद ही नहीं थे, तो बायोमेट्रिक उपस्थिति कैसे दर्ज हो सकती थी कि इस एफआईआर का असर उनके अन्य 11 केंद्रों पर भी पड़ा है और उनका भुगतान रोक दिया गया है। उनका कहना है कि ब्लैकलिस्ट की जानकारी देशभर में फैलने से वे अब कहीं भी काम नहीं कर पा रहे हैं।

इसी तरह, असम में होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण देने वाले एक अन्य ट्रेनिंग सेंटर के संचालक ने बताया कि निरीक्षण के दिन क्षेत्र में भीषण बाढ़ थी, जिसके कारण केंद्र बंद रखना पड़ा। इसके तुरंत बाद उन्हें निलंबन आदेश मिला और बाद में धोखाधड़ी व जालसाजी के आरोप में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी मिली।संचालक का कहना है, “हमें National Skill Development Corporation से एक भी पैसा नहीं मिला है।” उन्होंने अपने जवाब में लगातार तीन महीने तक चली भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति का हवाला देते हुए सफाई पेश की है।

असम स्थित केंद्र को भेजे गए कारण बताओ नोटिस में दो प्रमुख आरोप लगाए गए थे। पहला, निरीक्षण के दौरान कोई भी उम्मीदवार मौजूद नहीं मिला। दूसरा, दो अलग-अलग प्रशिक्षण केंद्रों को एक ही भवन में “मर्ज” कर दिया गया था, जो निर्धारित नियमों के खिलाफ माना गया।

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