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आज के दौर में जब हर चीज़ आसान किस्तों (EMI) पर उपलब्ध है, तो आम आदमी से लेकर बड़े शहरों में रहने वाले युवा तक, लगभग हर कोई कुछ न कुछ किस्तों में चुका रहा है। चाहे वो महंगा स्मार्टफोन हो, चमचमाती कार, या फिर एक सुंदर घर—सब कुछ EMI पर मिल रहा है। लेकिन क्या आपने कभी रुक कर यह सोचा है कि यह EMI हमें आगे ले जा रही है या हमें धीरे-धीरे कर्ज़ के दलदल में धकेल रही है?

इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर EMI का ये खेल कैसे काम करता है, कौन इसका सही उपयोग करता है, और कैसे यह हमारी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है।

EMI का सच : आंकड़े क्या कहते हैं ?

एक रिपोर्ट के अनुसार :

  • 70% iPhone EMI पर खरीदे जाते हैं
  • 80% कारें EMI पर चल रही हैं
  • 60% घर भी EMI पर ही खरीदे जाते हैं

ये आंकड़े भारत की मौजूदा वित्तीय सोच को दर्शाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो लोग अपनी आमदनी से ज्यादा खर्च कर रहे हैं और वो भी सिर्फ ‘दिखावे’ के लिए। लेकिन असली सवाल ये है कि क्या ये तरीका सही है ?

EMI

EMI यानी एक आसान फंदा :

EMI यानी ‘Equated Monthly Installment’। इसका मतलब है कि आप किसी प्रोडक्ट या सर्विस की पूरी कीमत एक साथ चुकाने की बजाय, हर महीने एक निश्चित राशि चुकाते हैं। यह सुविधा लोगों को तुरंत कुछ भी खरीदने की आज़ादी देती है। लेकिन इसी में एक खतरा भी छिपा है आदत की लत लग जाना ।

लोग EMI क्यों लेते हैं ?

  • तात्कालिक जरूरतें पूरी करना
  • दिखावे की मानसिकता
  • कैश की कमी
  • आकर्षक ऑफर्स और 0% ब्याज के झांसे

कर्ज़ : अच्छा और बुरा — फर्क समझिए

रॉबर्ट कियोसाकी (Rich Dad Poor Dad के लेखक) ने एक बड़ी बात कही थी :
“Rich people borrow to buy assets, poor people borrow to buy liabilities.”

यानी : ”अमीर लोग सम्पत्ति खरीदने के लिए उधार लेते हैं ।
और गरीब लोग जिम्मेदारीया उधार खरीदते हैं,,

अमीर लोग कर्ज़ लेकर संपत्ति बनाते हैं — जैसे प्रॉपर्टी, बिज़नेस, शेयर मार्केट में निवेश इत्यादि। ये चीजें उन्हें रिटर्न देती हैं।

गरीब और मध्यमवर्ग EMI लेकर महंगे मोबाइल, कार या फर्नीचर खरीदते हैं, जो न तो रिटर्न देता है और न ही संपत्ति में गिना जाता है।

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iPhone और कार : जरूरत या दिखावा ?

iPhone और लग्जरी कारें आम तौर पर लोगों के “Status Symbol” बन चुके हैं। खासकर युवा पीढ़ी में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कई लोग EMI पर iPhone खरीदते हैं जो 1 लाख रुपए से ऊपर का आता है, जबकि उनकी महीने की आय 25,000-30,000 रुपए होती है।

यही हाल कारों का है। EMI पर ली गई कार न सिर्फ आपकी जेब पर भारी पड़ती है, बल्कि उसके रख-रखाव का खर्च भी लगातार बना रहता है।

घर पर लिया गया लोन : संपत्ति या ज़िम्मेदारी ?

घर खरीदना हमेशा एक अच्छा निवेश माना गया है। लेकिन तब, जब आप :

  • EMI समय पर चुका सकते हैं
  • घर को रेंट पर देकर आय प्राप्त कर सकते हैं
  • उसके बदले टैक्स में छूट ले सकते हैं

लेकिन अगर घर खरीदने के चक्कर में आप अपनी 60-70% इनकम EMI में झोंक दें, तो वह आपके लिए संपत्ति नहीं बल्कि एक भारी ज़िम्मेदारी (liability) बन जाता है।

आर्थिक समझदारी : कैसे करें EMI का सही उपयोग ?

1‌. ज़रूरत और चाहत में फर्क करें।
सोचिए कि आप जो चीज़ EMI पर ले रहे हैं, क्या वह वाकई ज़रूरी है? या बस दिखावे के लिए?

2. कभी भी ईएमआई आपकी आय का 30% से ज्यादा ना हो
यह एक फाइनेंस रूल है जिसे अपनाने से आप कभी डिफॉल्ट नहीं करेंगे।

3. ब्याज दर और कुल भुगतान का आंकलन करें-
सिर्फ मासिक किस्त को देखना सही नहीं है, पूरी अवधि में आप कितना ब्याज दे रहे हैं — यह समझना जरूरी है।

4. संपत्ति बनाने पर ध्यान दें-
जैसे म्युचुअल फंड्स, SIP, प्रॉपर्टी, शेयर बाजार आदि में निवेश करें।

क्या EMI लेना गलत है ?

नहीं, अगर सही सोच के साथ लिया जाए EMI लेना बुरा नहीं है। कई बार यह आपको एक जरूरी चीज़ तुरंत प्राप्त करने में मदद करता है, जैसे:

  • बच्चों की पढ़ाई का खर्च
  • हेल्थ इमरजेंसी
  • बिज़नेस स्टार्ट करने का अवसर

लेकिन दिक्कत तब होती है जब आप इसे अपने लाइफस्टाइल को चमकाने के लिए इस्तेमाल करने लगते हैं।

सही विकल्प क्या हो सकता है ?

1. सेविंग और इन्वेस्टमेंट को प्राथमिकता दें ।

2. EMI से पहले खुद से ये 3 सवाल पूछें :

  • क्या मैं इसे बिना लोन लिए खरीद सकता हूँ?
  • क्या यह चीज़ मेरी आमदनी बढ़ाएगी?
  • क्या इसके बिना मैं कुछ और महीनों तक काम चला सकता हूँ?

3. फाइनेंशियल लिटरेसी बढ़ाएं :
किताबें पढ़ें, वीडियो देखें, फाइनेंशियल प्लानर से सलाह लें।

निष्कर्ष :

सोच-समझ कर लें निर्णय आज की दुनिया में ईएमआई एक सुविधा है, लेकिन अगर समझदारी से इसका इस्तेमाल न किया जाए तो यह मुसीबत भी बन सकती है। ज़रूरत है एक सही सोच की, एक सही प्राथमिकता की।

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ध्यान रखिए : “दिखावे के लिए जीने वाला इंसान कभी भी सुकून से नहीं जी पाता।”

इसलिए अगली बार जब कोई नया फोन, कार या कोई लग्जरी चीज़ आपको लुभाए, तो खुद से पूछिए — क्या यह मुझे अमीर बना रहा है या और गरीब?

”CHOOSE WISELY,,

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नमस्कार दोस्तों ! मै संदीप राना !  लेखक बस शब्दों से नहीं, विचारों से बात करता है। राजनीति, फाइनेंस ,इतिहास, और जीवन के हर कोने से जुड़े मुद्दों पर लिखना मुझे पसंद है। मेरा मकसद है जटिल बातों को आसान भाषा में आप तक पहुंचाना, ताकि पढ़ते-पढ़ते आप सिर्फ समझें नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर हो जाएं। 7 साल का वित्तीय अनुभव और जीवन की गहरी समझ ने मुझे चीजों को एक अलग नजरिए से देखने की आदत दी है। DSR Inspiration के ज़रिए मैं बस यही चाहता हूं कि हम मिलकर उन विषयों पर बात करें जो सच में मायने रखते हैं। अगर आप भी नए विचारों से रूबरू होना चाहते हैं, तो जुड़े रहे हमारे साथ। 😊 धन्यवाद् 

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