उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर देश और दुनिया में जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वापर श्री कृष्ण पुरी में निवास करने लगे। जग के नाथ यानी जगन्नाथ बन गए। उड़ीसा के पूरी जगन्नाथ मंदिर चारों धाम में से एक है। बताया जाता है। कि यहां भगवान श्री कृष्णा अपनी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ विराजमान है।
7 जुलाई 2024 को जगन्नाथ रथ यात्रा का पर्व मनाया गय। इस रथ पर विराजमान होकर भगवान जगन्नाथ बहन सुभद्रा बलराम मौसी के घर गुड़िचा मंदिर पहुंचे। 10 दिन तक मौसी के घर रहने के बाद वह जगन्नाथ मंदिर लौट जाएंगे।
वर्तमान में पुरी का जगन्नाथ मंदिर रतन भंडार के लिए चर्चा में है। 46 साल बाद खोला गया। उससे पहले मंदिर के चारों द्वार खोले गए। और रविवार को धार्मिक अनुष्ठान के बाद शुभ मुहूर्त 1:28 मिनट पर खोला गया। इससे पहले रतन भंडार 1978 में खोला गया था। और फिर उसके बाद उसे कभी नहीं खोला गया। और इतने सालों के बाद रतन भंडार की चाबियां भी खो गई। जब सालों बाद रतन भंडार खुला है तो लोग यह जानने के लिए जानने के लिए उत्सुक है।
जगन्नाथ के मंदिर में रतन भंडार में क्या-क्या मिला।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रतन भंडार से क्या-क्या मिला।46 साल बाद रतन भंडार को खोल ने का उद्देश्य आभूषणों की मूल्यवान वस्तुओं की सूची बनाना है। और रत्न भंडार की मरम्मत करना है। रतन भंडार में क्या-क्या मिला इसकी सूची बनाने में टाइम लगेगा। रिपोर्ट के मुताबिक रतन भंडार में बहुमूल्य सोने वह हीरो के आभूषण है। रतन भंडार में दो कक्ष है। एक बाहरी कक्ष और एक भीतरी कक्ष दोनों में ही भगवान जगन्नाथ का खजाना रखा हुआ है।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य अधिकारी अरविंद पाधी ने बताया रतन भंडार के बाहरी कक्ष की तीन चाबियां थी। और भतरी कक्ष की चाबियां गायब है।उड़ीसा के मैगजीन के मुताबिक , बाहरी कक्ष मैं भगवान जगन्नाथ के सोने के मुकुट, तीन सोने के हार है। वहीं भीतरी कक्ष में करीब 74 सोने के आभूषण है। जिसमें हर एक का वजन 100 तोला है। इसमें अलग-अलग तरह के आभूषण है सोना चांदी हीरा मूंगा और मोतियों से बने आभूषण भी शामिल है।
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